क़यामत का दिन और इंसान के आमाल

आखिरत में हर रूह का हिसाब:

क़यामत का दिन वह दिन होगा जब हर रूह को उसके जिस्म में वापस लौटा दिया जाएगा। उस दिन अल्लाह अज़्ज़वजल के क़ुर्ब (निकटता) से अजीब नेमतें हासिल होंगी। कुछ को अल्लाह की रहमत से जन्नत की सआदतें मिलेंगी, तो कुछ अपने गुनाहों के कारण सज़ा पाएँगे। जहाँ आज इंसान बुराइयों में डूबा हुआ है, वहीं क़यामत के दिन नेकियों की बदौलत बुराइयाँ माफ़ कर दी जाएँगी।

हर रूह अपने जिस्म को उस इल्म से पहचान लेगी जो अल्लाह ने उसे अता किया होगा। जिस तरह भेड़ अपनी औलाद को पहचान लेती है, उसी तरह रूह अपने जिस्म की तरफ़ लौटेगी। इसी तरह हर इंसान का आमालनामा (अच्छे और बुरे कामों की किताब) उसके पास आएगा। नेक लोगों को आमालनामा दाहिने हाथ में दिया जाएगा और गुनहगारों को बाएँ हाथ में।

अगर किसी इंसान ने दुनिया में मुजाहदा (मेहनत करके) नेक आदतें अपनाई होंगी तो क़यामत के दिन वही नेकियाँ उसके सामने खड़ी होंगी। हमारा सोना, जागना, जीना और मरना – सब चीज़ें गवाही देंगी कि हमने कैसी ज़िंदगी गुज़ारी।

आज हमारे आमाल फरिश्तों द्वारा लिखे जाते हैं लेकिन छिपे रहते हैं, क़यामत में यही सब ज़ाहिर कर दिए जाएँगे। जैसे कारीगर के दिल में उठने वाला ख़याल किसी चीज़ की शक्ल अख़्तियार कर लेता है, या जैसे ज़मीन में दबा बीज पेड़ बन जाता है – उसी तरह इंसान के दिल के इरादे, नीयत और मक़सद उस दिन सामने आ जाएँगे।

क़यामत के दिन इंसान के दिल के सारे राज़ सब पर ज़ाहिर होंगे। जैसे लालटेन के अंदर तेल का मालूम हो जाता है, वैसे ही इंसान के अंदर की हालत खुल जाएगी। मुत्तक़ी (परहेज़गार) लोग हरे-भरे पेड़ की तरह होंगे, जबकि गुनहगार सूखे पेड़ की तरह खड़े होंगे।

क़ुरआन में अल्लाह फ़रमाता है कि हम उनके मुँह पर मुहर लगा देंगे और उनके हाथ-पाँव उनके आमाल की गवाही देंगे। यानी इंसान के हर गुनाह और नेकी की गवाही उसी का जिस्म देगा। चोर के घर से जब चोरी का माल निकलता है तो सबूत पूरा हो जाता है, उसी तरह गुनाहगार के लिए उसके आमाल ही गवाही देंगे।

उस वक़्त फरिश्ते गुनहगारों को जहन्नम की तरफ़ धकेल देंगे और वह बार-बार पलटकर रहमत की उम्मीद लगाएगा, लेकिन उसे आवाज़ आएगी –

ऐ झूठे! तू नेक आमाल से ख़ाली है, तो किस सज़ा का इंतज़ार कर रहा है?

हमें इस वाक़िये से क्या सीख मिलती है?

इस वाक़िये से हमें यह सीख मिलती है कि क़यामत का दिन इंसाफ़ का दिन होगा, जहाँ हर इंसान अपने किए का हिसाब देगा। झूठी उम्मीद, धोखा और गुनाह उस दिन किसी काम नहीं आएँगे। इसलिए हमें दुनिया में ही अपनी नीयत, आमाल और आदतों को सुधारना चाहिए, ताकि आख़िरत में हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत की सआदतें मिल सकें।

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