इंसान के नेक अमल और रूहानी सफर की हकीकत

इंसान और अल्लाह की क़ुरबत का राज़:

इंसान के लिए सबसे बड़ा साथी उसके नेक अमल (अच्छे काम) होते हैं। नेक अमल उसकी रूह के हमसफ़र बनते हैं, जबकि बुरे अमल उसकी ज़िंदगी को ज़हर बना देते हैं। क़यामत के दिन भी नेक अमल इंसान के लिए रहमत बनेंगे और बुरे अमल साँप और बिच्छू की तरह उसकी सज़ा बनेंगे।

इसलिए इंसान को हमेशा नेक काम करने चाहिए। लेकिन नेक काम और रूहानी हुनर बिना उस्ताद (शेख़) की रहनुमाई के हासिल नहीं होते।

इल्म और अमल का रिश्ता

हर चीज़ को पाने का पहला ज़रिया इल्म (ज्ञान) है। पहले इंसान सीखता है, फिर उस पर अमल करता है। अगर कोई नसीहत करने वाला हो तो उसे ध्यान से सुनना चाहिए, क्योंकि सच्चा इल्म इंसान को घमंड से बचाता है।

बुज़ुर्ग फरमाते हैं कि शिक्षा पाने के लिए इंसान को सादगी और फ़क़्र का लिबास अपनाना चाहिए। असली इल्म किताबों और ज़बान से सिखाया जाता है, लेकिन हुनर (कौशल) केवल अमल और तजुर्बे से आता है।

रूहानी सफर में हुनर की अहमियत

अल्लाह की ज़ात तक पहुँचने के लिए इल्म से ज़्यादा हुनर की ज़रूरत है। यह हुनर सिर्फ़ शेख़-ए-कामिल की सोहबत से मिलता है, न कि सिर्फ़ बातें करने से। अल्लाह का नूर औलिया-ए-किराम के दिलों में होता है और वही नूर आगे तलबगारों के दिलों में पहुँचता है।

जो शख़्स इस सफर का मुसाफ़िर होता है, उसके दिल में बहुत से इशारे आते हैं, लेकिन वह उन्हें समझ नहीं पाता। जब अल्लाह का नूर उसे समझा देता है, तो उसका दिल खुल जाता है और उसे वह इल्म मिलता है जिसे इल्म-ए-शरह कहा जाता है।

कुरआनी रहनुमाई और शरह-ए-सद्र

कुरआन में अल्लाह तआला ने रसूल-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से फरमाया: क्या हमने आपका सीना नहीं खोल दिया?
इसका मतलब है कि अल्लाह ने अपने नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को वह नूर दिया, जिससे वह आसानी से तमाम रहस्यों को समझ सके।

असल में इल्म बाहर से नहीं आता, बल्कि वह इंसान के दिल और रूह में पहले से मौजूद होता है। हज़रत सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को ख़िताब किया गया, लेकिन इस में हर सच्चा तलबगार भी शामिल है।

इंसान और अल्लाह की क़ुरबत

हर इंसान के साथ अल्लाह तआला मौजूद है, लेकिन इंसान का अपना नफ़्स और ख्यालात उसके बीच में हाइल हो जाते हैं। दिल में अगर अल्लाह के दीदार की सच्ची तलब हो, तो वह मंज़िल मिल जाती है।

मिसाल के तौर पर इंसान उस सवार की तरह है जो घोड़े पर बैठा है, लेकिन फिर भी घोड़े को ढूँढ रहा है। लोग उससे कहते हैं कि घोड़ा तो तेरे नीचे ही है, लेकिन वह फिर भी ढूँढता रहता है। यही इंसान की हालत है – अल्लाह उसके साथ है, लेकिन इंसान अपने ग़लत ख्यालों की वजह से उसे महसूस नहीं कर पाता।

ख्यालात की रुकावट

इंसान का अपना दिल और उसकी आँखें कभी-कभी रुकावट बन जाती हैं। जैसे आँख पर पर्दा हो और वही आँख हक़ीक़त देखने का ज़रिया भी है। यही हालत इंसान के कानों और सोच की है – अगर वह ग़लत सोच में पड़ जाए तो खुद अपने लिए रुकावट बन जाता है।

सीख

इस वाक़िए से हमें यह सबक मिलता है कि:

  • इंसान का असली साथी उसके नेक अमल हैं।

  • इल्म ज़रूरी है, लेकिन रूहानी हुनर शेख़-ए-कामिल की सोहबत से मिलता है।

  • अल्लाह की ज़ात इंसान के बेहद क़रीब है, लेकिन इंसान अपने ख्यालात और ग़फ़लत से खुद को दूर कर लेता है।

  • अल्लाह के दीदार की तलब इंसान के दिल में होनी चाहिए और यही तलब उसे हक़ीक़त तक ले जाती है।

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