हसन व हुसैन की हिफाज़त का अनोखा वाक़िया

हज़रत फ़ातिमा की चिंता और जिब्राईल की ख़बर:

इस वाकिए में एक बड़ा प्यारा किस्सा आता है। एक बार हज़रत इमाम हसन और इमाम हुसैन (रज़ि.अन्हुमा) बचपन में घर से कहीं बाहर चले गए। जब उनकी माँ हज़रत फ़ातिमा (रज़ि.) ने देखा कि दोनों बच्चे घर पर नहीं हैं, तो वह परेशान हो गईं।

उसी वक़्त हज़रत मुहम्मद सल्लालहु अलैहि वसल्लम घर में तशरीफ़ लाए। हज़रत फ़ातिमा ने घबराते हुए अर्ज़ किया:

या रसूल अल्लाह! हसन और हुसैन कहीं खो गए हैं और मुझे नहीं पता कि वे कहाँ चले गए।

जिब्राईल की खबर और अल्लाह की हिफाज़त
इतने में जिब्राईल अमीन हाज़िर हुए और नबी सल्लालहु अलैहि वसल्लम से अर्ज़ किया: या रसूल अल्लाह! आप परेशान न हों, आपके दोनों नूरानी शहज़ादे फलाँ जगह पर हैं। अल्लाह ने उनकी हिफाज़त के लिए एक फ़रिश्ता मुक़र्रर किया हुआ है।

यह सुनकर नबी सल्लालहु अलैहि वसल्लम फ़ौरन उस जगह की तरफ़ रवाना हुए।

फ़रिश्ते की परवरिश और नबी सल्लालहु अलैहि वसल्लम का प्यार
जब नबी सल्लालहु अलैहि वसल्लम वहाँ पहुँचे तो देखा कि हसन और हुसैन आराम से सो रहे हैं। पास ही एक फ़रिश्ता मौजूद था—उसका एक बाज़ू बच्चों के नीचे बिछा हुआ था और दूसरे बाज़ू से वह दोनों पर साया किए बैठा था ताकि धूप या हवा उन्हें तकलीफ़ न दे।

नबी सल्लालहु अलैहि वसल्लम का दिल ख़ुशी और मोहब्बत से भर गया। आपने दोनों बच्चों का चेहरा चूमा, उन्हें गोद में उठाया और सुरक्षित घर ले आए।

हमें क्या सीख मिलती है?

इस इस्लामी वाक़िया से हमें यह सिखने को मिलता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों और उनके बच्चों की हिफाज़त के लिए ख़ास इंतज़ाम करता है। यह भी पता चलता है कि हज़रत मुहम्मद सल्लालहु अलैहि वसल्लम अपने नाती इमाम हसन और इमाम हुसैन से कितनी मोहब्बत फरमाते थे। हमें चाहिए कि हम भी अल्लाह पर भरोसा रखें और बच्चों की तर्बियत और हिफाज़त के लिए दुआ करते रहें।

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