नमरूद और हज़रत इब्राहीम का मुनाज़रा

नमरूद और हज़रत इब्राहीम का मुनाज़रा – ईमान की दलील:

इस्लामी इतिहास में कई ऐसे वाक़ियात हैं जो हमें अल्लाह की महानता और उसकी तौहीद (एकेश्वरवाद) की हक़ीक़त दिखाते हैं। उनमें से एक मशहूर वाक़िया है – हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और नमरूद का मुनाज़रा (बहस)।

नमरूद का सवाल – तुम्हारा रब कौन है?

जब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने नमरूद को अल्लाह की इबादत की दावत दी तो नमरूद ने अहंकार से पूछा:
तुम्हारा रब कौन है, जिसकी परस्तिश की दावत तुम मुझे देते हो?

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने सुकून और हिकमत से जवाब दिया:
मेरा रब वही है, जो ज़िन्दा करता है और मौत भी देता है।

नमरूद का झूठा दावा

नमरूद ने अपनी शक्ति दिखाने की कोशिश की। उसने दो आदमियों को बुलवाया – एक को क़त्ल कर दिया और दूसरे को छोड़ दिया। फिर घमंड से बोला:
देख लो! मैंने एक को मार डाला और एक को ज़िन्दा छोड़ दिया। यह ताक़त मेरे पास भी है।

यह उसकी अज्ञानता और झूठी अकड़ थी, क्योंकि असली मौत और ज़िन्दगी का मालिक केवल अल्लाह है।

इब्राहीम अलैहिस्सलाम का बेहतरीन जवाब

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने नमरूद की नादानी का मज़ाक उड़ाते हुए दूसरा सवाल रखा।
उन्होंने कहा:
मेरा रब सूरज को मशरिक (पूरब) से निकालता है। अगर तुझमें ताक़त है तो तू इसे मगरिब (पश्चिम) से निकाल कर दिखा।

यह सुनकर नमरूद हक्का-बक्का रह गया। उसके पास कोई जवाब न था। उसकी अकड़ और दावे सब धूल में मिल गए और वह चुप हो गया।

हमें क्या सीख मिलती है?

इस वाक़िए से हमें ये सबक मिलता है कि इंसान कितना भी ताक़तवर क्यों न हो, अल्लाह की कुदरत के सामने उसकी कोई हैसियत नहीं। असली मालिक वही है जो ज़िन्दगी देता है, मौत देता है और सूरज को हर दिन पूरब से निकालता है।
एक सच्चा मोमिन वही है जो अल्लाह पर ईमान रखे और उसकी तौहीद को सबसे ऊपर माने।

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