नेक और बुरे इंसान की संगत से मिलने वाले सबक

नबी का मुकाम और शैतान का इंकार:

इंसान की सोच और रिश्तों की गहराई पर बेहतरीन रोशनी डालते हैं।

एक दाना (बीज) ने एक कुएँ और लाल पत्थर (लालक) को साथ देखा तो हैरान हुआ और उसने सोचा कि आखिर इन दोनों में कौन-सी समानता है जिसकी वजह से ये साथ हैं? गहराई से सोचने पर पता चला कि दोनों लंगड़े हैं, यानी उनकी कमजोरी समान है। इससे समझ आता है कि साथ रहने के लिए कुछ न कुछ समानता ज़रूरी होती है।

इसी तरह, नबी जो अर्श का शाहबाज़ (ऊँचा मकाम रखने वाले) हैं और जो लोग दीन का इनकार करते हैं, वे कभी एक जैसे या हमसफ़र नहीं हो सकते। जैसे अलीयीन का चमकता सूरज “सिज्जीन” की चमगादड़ों के लिए अजनबी है।

नेक और बुरे का फर्क
एक इंसान जो अपनी करम-नवाज़ी से दूसरों को लाभ पहुँचाता है, वह उस इंसान के बराबर नहीं हो सकता जो हर वक़्त अपनी कमी और गंदगी में डूबा रहता है। अगर कोई कीड़ा बाग़ की खुशबू से भाग जाए, तो यह बाग़ की कमी नहीं बल्कि उसका कमाल है।

अल्लाह के नेक बंदों की गैरत
अल्लाह के नेक बंदों की फितरत है कि वे अल्लाह के दुश्मनों से दूरी बनाए रखें। क्योंकि बुरों का भलों से मेलजोल होना, भलों के लिए नुक़सान का कारण बन सकता है। यही वजह है कि अच्छे लोगों को हमेशा अपनी संगत और दोस्ती सोच-समझकर करनी चाहिए।

हज़रत नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सीना मुबारक
हज़रत नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सीने को कई बार शफ़ा (सर्जरी की तरह) किया गया ताकि उसे पूरी तरह से पवित्र और नूरानी बना दिया जाए। यह सब अल्लाह की मंशा के मुताबिक़ था, ताकि कोई भी नबी की हमसरी (बराबरी) का दावा न कर सके।

शैतान का सिजदा न करना
शैतान ने जब हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को सजदा करने से इनकार किया तो यह उसकी नासमझी और घमंड था। लेकिन अल्लाह की हिकमत यह थी कि अगर शैतान सजदा कर भी लेता, तो भी आदम अलैहिस्सलाम का दूसरा कमाल सामने आना था। एक तरफ़ फरिश्तों का सजदा उनके मुक़ाम की गवाही है और दूसरी तरफ़ शैतान का इंकार भी इस बात की गवाही है कि आदम अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने बे-मिसाल बनाया।

इस वाक़िए से हमें क्या सीख मिलती है?

  • अच्छे और बुरे लोगों का मेलजोल कभी बराबरी का नहीं होता।

  • अल्लाह के नेक बंदों को हमेशा बुरे लोगों से दूर रहना चाहिए।

  • नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का मकाम किसी और के बराबर नहीं हो सकता।

  • शैतान का इनकार भी अल्लाह की हिकमत और इंसान के कमाल की दलील है।

  • संगत का असर इंसान की ज़िंदगी पर गहरा पड़ता है।

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